बेटी की फिक्र…. पापा मैंने आपके लिए हलवा बनाया है 11 साल की चेतना अपने पिता मोहन से बोली जो ऑफिस से घर मे घुसा ही था। मोहन – अच्छा क्या बात है ? अच्छा खिला फिर अपने पापा को, चेतना दौड़ती रसोई मे गई और बडा कटोरा भरकर हलवा लेकर आई। मोहन ने खाना शुरू किया और चेतना को देखा ! मोहन की आँखों मे आँसू थे। चेतना – क्या हुआ पापा हलवा अच्छा नही लगा ? मोहन – नही मेरी बेटी हलवा तो बहुत अच्छा बना है, और देखते देखते पूरा कटोरा खाली कर दिया इतने मे मोहन की पत्नी राधा बाथरूम से नहाकर बाहर आई। और बोली – ला मुझे भी खिला तेरा हलवा मोहन ने चेतना को 50 ₹ इनाम मे दिए। चेतना खुशी से मम्मी के लिए रसोई से हलवा लेकर आई मगर ये कया जैसे ही उसने हलवा की पहली चम्मच मुंह मे डाली…
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